Anant Singh Crime Story, बिहार की राजनीति में बाहुबल और सत्ता का रिश्ता पुराना है। मोकामा के बाहुबली और पूर्व विधायक अनंत सिंह का नाम आज फिर चर्चा में है, जब उन्हें राजद नेता दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया। अस्सी के दशक से शुरू हुई खूनी जंग, बदले की आग, और राजनीति में बढ़ते कदमों ने अनंत सिंह को “छोटे सरकार” बना दिया।,मोकामा के बाहुबली की खून और सियासत से भरी कहानी, कैसे बना ‘छोटे सरकार’? जानिए कैसे एक सामान्य युवक से वो बने बिहार के सबसे ताकतवर बाहुबली — जिनका आतंक बाढ़ से लेकर पटना तक फैला। यह लेख अनंत सिंह की पूरी क्राइम कुंडली, उनकी राजनीतिक ताकत, और संपत्ति साम्राज्य को विस्तार से बताता है।

Anant Singh Crime Story: खून, सियासत और सत्ता का खेल
बिहार की राजनीति में अपराध और बाहुबल की जड़ें बहुत गहरी हैं। मोकामा का नाम लेते ही आज भी एक चेहरा उभरता है — अनंत सिंह, जिसे लोग “छोटे सरकार” कहकर पुकारते हैं। 64 साल के अनंत सिंह अब फिर सुर्खियों में हैं, क्योंकि राजद नेता और जनसुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में उनकी गिरफ्तारी हो चुकी है। इस घटना ने एक बार फिर से मोकामा की उस खूनी विरासत को सामने ला दिया है, जिसकी शुरुआत अस्सी के दशक में हुई थी।
अनंत सिंह की कहानी( Anant Singh Crime Story) किसी फिल्म से कम नहीं। अस्सी के दशक में उनके बड़े भाई विरंची सिंह की हत्या मुन्नी लाल सिंह नामक गांववाले ने कर दी थी। इस हत्या ने अनंत सिंह को बदल दिया। उन्होंने बदले की राह चुनी और मुन्नी लाल सिंह के कई परिजनों को मौत के घाट उतारा। इसी के साथ बाढ़-मोकामा में अनंत सिंह का नाम फैल गया। जो उनके खिलाफ आवाज उठाता, उसकी जुबान हमेशा के लिए बंद कर दी जाती।
1985 का साल मोकामा की धरती पर खून से लिखा गया था। अनंत सिंह की दुश्मनी मोकामा के महेश सिंह से हो गई थी। सत्ता और बदले की लड़ाई में अनंत ने मोकामा के रंगरूट नरेश सिंह के साथ मिलकर जेपी चौक पर बम मारकर महेश सिंह की हत्या कर दी। यह घटना इतनी चर्चित हुई कि पूरे बिहार में अनंत सिंह का नाम “खौफ के प्रतीक” के रूप में जाना जाने लगा।
राजपूत बनाम अनंत सिंह: खून से सींची बाढ़ की धरती
Anant Singh Crime Story 1980 के दशक के आखिर तक अनंत सिंह और बाढ़ के राजपूत युवकों के बीच खूनी जंग छिड़ गई। इस दौर में दर्जनों हत्याएं हुईं। 1990 में राजनीति में भी उनका दबदबा बढ़ने लगा। उनके भाई दिलीप सिंह ने जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा और सियासी रास्ता खोला। 1995 में उनके दूसरे भाई सच्चिदानंद सिंह (फाजो सिंह) ने चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इस हार का गुस्सा अनंत सिंह ने विवेका पहलवान पर निकाला, जिसके चलते दोनों के बीच भीषण गैंगवार हुई, जिसमें कई लोग मारे गए।
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2000 के दशक में खून और सत्ता की साझेदारी
Anant Singh Crime Story 2000 में बाढ़ में हुए बच्चू सिंह हत्याकांड ने अनंत सिंह के क्रूर चेहरों में एक और अध्याय जोड़ दिया। उन्होंने अपने भाई की जीत के लिए बच्चू सिंह को गोली मारने के बाद सिर काट दिया। यही वो दौर था जब उनका नाम “छोटे सरकार” के रूप में मशहूर हुआ। बाद के वर्षों में भी उनके नाम कई वारदातें दर्ज हुईं — जिनमें यादव समाज के पुटुस यादव की हत्या (2014) जैसी घटनाएं शामिल हैं।
राजनीति में बाहुबल का खेल
अनंत सिंह सिर्फ अपराधी ही नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक “जरूरी ताकत” बन गए। कभी लालू यादव के करीबी, तो कभी नीतीश कुमार के सहयोगी — उन्होंने हर राजनीतिक दौर में खुद को सत्ता के साथ जोड़े रखा। उनके भाई दिलीप सिंह भी विधायक रहे और मोकामा क्षेत्र पर दोनों भाइयों का गहरा प्रभाव बना रहा।
दुलारचंद हत्याकांड: पुराने दुश्मनों का नया अध्याय
Anant Singh Crime Story 2025 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मोकामा में फिर बारूद फटा। जनसुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या हो गई। आरोप सीधे अनंत सिंह और उनके भतीजों पर लगा। दुलारचंद भी अपने समय के बड़े बाहुबली माने जाते थे और लालू-नीतीश दोनों से करीबी रखते थे। कहा जाता है कि 90 के दशक में लालू यादव ने बाढ़-मोकामा में दिलीप सिंह को टक्कर देने के लिए दुलारचंद को खड़ा किया था। अब वही पुरानी दुश्मनी नए रूप में सामने आई।हाल ही में अनंत सिंह एक बार फिर सुर्खियों में आए जब राजद नेता दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में उनका नाम सामने आया। पुलिस जांच में कई पुराने गैंग कनेक्शन और राजनीतिक रंजिश की बातें सामने आईं। दुलारचंद यादव की हत्या को मोकामा की सत्ता संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जाता है कि इस वारदात के पीछे पुरानी दुश्मनी और इलाके पर पकड़ बनाए रखने की लड़ाई अहम वजह रही।
अनंत सिंह ने हमेशा खुद को निर्दोष बताया, लेकिन इस केस ने उनके बाहुबली इमेज को फिर से जीवित कर दिया। बिहार पुलिस ने उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की और पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोली जा रही हैं।
‘छोटे सरकार’ की दौलत और वैभव
अनंत सिंह सिर्फ अपराध और राजनीति में नहीं, बल्कि संपत्ति के मामले में भी “बाहुबली” हैं।
उनके चुनावी हलफनामे के मुताबिक, वे करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं।
उनके पास हाथी-घोड़े से लेकर लैंड क्रूज़र, शेयर मार्केट में करोड़ों का निवेश, फार्महाउस और लग्जरी जीवनशैली है।
उनकी पत्नी के नाम भी लाखों की संपत्ति दर्ज है।
बिहार की राजनीति में बाहुबली युग
बिहार की राजनीति में बाहुबलियों का दौर 90 के दशक में शुरू हुआ। उस वक्त हर इलाके का अपना “बाहुबली नेता” था —
सीवान से शहाबुद्दीन, कोशी से पप्पू यादव, और मोकामा से अनंत सिंह।
हर पार्टी ने इन्हें अपनी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनाया।
राजद, जेडीयू, लोजपा, भाजपा — सभी ने अपने-अपने “दबंग चेहरों” को टिकट देकर चुनावी समीकरण साधे।
आज भी बिहार की राजनीति का समीकरण “बाहुबली बनाम बाहुबली” पर टिक जाता है।मोकामा का सच: जहां सियासत और खून एक साथ बहते हैं
अनंत सिंह की कहानी सिर्फ एक अपराधी की नहीं, बल्कि बिहार की उस सियासत का आईना है, जहां सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने के लिए खून की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मोकामा का टाल इलाका आज भी अपने अतीत के साये से बाहर नहीं निकल पाया। एक तरफ चुनावी भाषणों की गूंज है, तो दूसरी तरफ गोलियों की आवाजें — यही बिहार की राजनीति का असली चेहरा है।
दुलारचंद यादव हत्याकांड में आधी रात छापा, मोकामा के बाहुबली पर टूटा कानून का शिकंजा
बिहार की राजनीति में हलचल मचाने वाली एक बड़ी घटना शनिवार देर रात सामने आई। मोकामा के बाहुबली और पूर्व विधायक अनंत सिंह को पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी राजद नेता दुलारचंद यादव की हत्या से जुड़ी है, जिसने पूरे प्रदेश की सियासत को हिला दिया है।
जानकारी के अनुसार, पटना एसएसपी के नेतृत्व में पुलिस की विशेष टीम ने आधी रात बाढ़ के कारगिल मार्केट इलाके में छापा मारा और वहां से अनंत सिंह को हिरासत में ले लिया। इससे पहले चर्चा थी कि अनंत सिंह खुद सरेंडर कर सकते हैं, लेकिन पुलिस ने ऐक्शन लेते हुए उन्हें सीधे गिरफ्तार कर लिया।आधी रात का सनसनीखेज छापा: मोकामा के बाहुबली अनंत सिंह गिरफ्तार!बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। विधानसभा चुनावों के बीच मोकामा क्षेत्र से जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के प्रत्याशी और कुख्यात बाहुबली नेता अनंत सिंह को पुलिस ने शनिवार (1 नवंबर 2025) की आधी रात को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई मोकामा के तारतर इलाके में 30 अक्टूबर को हुई आरजेडी नेता दुलारचंद यादव की हत्या के मामले से जुड़ी है। पटना पुलिस के इस ‘मिडनाइट ऑपरेशन’ ने पूरे राज्य को चौंका दिया है।गिरफ्तारी की पूरी कहानी: मिनट-टू-मिनट अपडेटपटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के नेतृत्व में लगभग 150 पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम ने रात करीब 11:10 बजे अनंत सिंह के बाढ़ स्थित ‘कारगिल मार्केट’ आवास पर छापा मारा। दिन भर चुनाव प्रचार में व्यस्त अनंत सिंह शाम को घर लौटे थे। पुलिस टीम ने घर घेर लिया और 11:45 बजे तक उन्हें हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद, उन्हें उनके दो सहयोगियों—मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम—के साथ पटना ले जाया गया। एसएसपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अनंत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया है, क्योंकि हत्याकांड के समय वे घटनास्थल पर मौजूद थे।दुलारचंद यादव के पोते की शिकायत पर दर्ज FIR में आरोप है कि अनंत सिंह के समर्थकों ने पहले गोली चलाई और फिर गाड़ी चढ़ाकर हत्या की। पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, लेकिन जांच में अनंत सिंह की भूमिका सामने आई। अब यह केस सीआईडी को सौंप दिया गया है, और चुनाव आयोग ने भी रिपोर्ट मांगी है।

अनंत सिंह का पहला बयान: “सत्यमेव जयते, जनता लड़ेगी चुनाव!”गिरफ्तारी के कुछ ही मिनट बाद अनंत सिंह के फेसबुक पेज पर एक पोस्ट वायरल हो गया: “सत्यमेव जयते! मुझे मोकामा की जनता पर पूरा भरोसा है, अब चुनाव मोकामा की जनता लड़ेगी।” यह पोस्ट उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि करता है और समर्थकों को एकजुट होने का संदेश देता है। अनंत सिंह, जो मोकामा से पांच बार विधायक रह चुके हैं, पर पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं—हथियार रखने से लेकर अपहरण तक।सियासी रंग: विपक्ष का ‘जंगलराज’ का आरोपयह गिरफ्तारी बिहार चुनावों के संवेदनशील दौर में आई है, जहां 6 और 11 नवंबर को मतदान होना है। विपक्षी दल आरजेडी और जन सुराज ने इसे सत्ताधारी NDA की साजिश बताया है। जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी ने कहा, “पुलिस की देरी पर सवाल है, लेकिन कार्रवाई स्वागतयोग्य।” वहीं, जेडीयू ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। अनंत सिंह की अनुपस्थिति में अब उनके समर्थक चुनाव कैसे लड़ेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।अनंत सिंह को रविवार (2 नवंबर) को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा। मोकामा की सड़कों पर तनाव है, और पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है। क्या यह गिरफ्तारी बिहार की ‘बाहुबली’ राजनीति का अंत है, या फिर एक नया अध्याय? बिहार की जनता इंतजार कर रही है।
CID ने संभाली जांच, जुटाए कई अहम सबूत
इस हत्याकांड की जांच अब बिहार पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने अपने हाथ में ले ली है। जांच की निगरानी डीआईजी जयंत कांत कर रहे हैं, जिन्होंने खुद मोकामा टाल के बसावन चक इलाके का दौरा किया — वही जगह जहां दुलारचंद यादव की हत्या हुई थी।
सीआईडी की टीम ने एफएसएल (Forensic Science Lab) विशेषज्ञों के साथ मिलकर पूरे क्षेत्र की जांच की।
जांच के दौरान कई क्षतिग्रस्त वाहनों से सबूत एकत्र किए गए, जिनसे फॉरेंसिक सैंपल लिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल से कुछ रेलवे ट्रैक के पत्थर बरामद हुए हैं, जो उस इलाके में स्वाभाविक रूप से नहीं पाए जाते। इससे यह संदेह गहराता है कि हत्या की साजिश पहले से रची गई थी। ये सारे नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिए गए हैं।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने खोले कई रहस्य
शुरुआती रिपोर्टों में दावा किया गया था कि दुलारचंद यादव की मौत गोली लगने से हुई, लेकिन पोस्टमॉर्टम ने इस दावे को पूरी तरह बदल दिया।
तीन डॉक्टरों के पैनल ने बाढ़ के अस्पताल में मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में करीब दो घंटे तक विस्तृत पोस्टमॉर्टम किया। रिपोर्ट के अनुसार, दुलारचंद यादव को गोली जरूर लगी थी, लेकिन मौत का असली कारण छाती पर किसी भारी वाहन के चढ़ने से हुई गंभीर चोटें थीं। इससे उनकी हड्डियाँ टूट गईं और फेफड़े फट गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
मामले में कई परतें बाकी
जांच एजेंसियों को अब हत्या में शामिल संभावित लोगों और वाहनों की पहचान पर फोकस करना है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को कुछ वीडियो फुटेज और कॉल रिकॉर्ड्स भी मिले हैं, जो इस मामले की दिशा तय कर सकते हैं।
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुई इस बड़ी कार्रवाई ने न केवल मोकामा की सियासत को गरमा दिया है, बल्कि राज्य भर में अपराध और राजनीति के रिश्ते पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Source: Google News