“PoK लेकर रहेंगे! ये काम भाजपा ही करेगी – संसद में गरजे Amit shah”

30 जुलाई 2025 को राज्यसभा में हुई चर्चा ने भारतीय राजनीति के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में विपक्ष के तीखे सवालों का जवाब देते हुए साफ-साफ कहा कि गुलाम जम्मू-कश्मीर POK को वापस लाने का कार्य भाजपा सरकार ही करेगी।

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यह बयान उस समय आया जब विपक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर और PoK के मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीयत और नीति पर सवाल उठाए।

POK

मुख्य बिंदु (Highlights):

  • अमित शाह ने राज्यसभा में कहा – “गुलाम कश्मीर वापस लाने का काम भाजपा सरकार ही करेगी।”
  • कांग्रेस पर हिंदुओं को आतंकवादी बताने और तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप।
  • ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और आत्मरक्षा के अधिकार का ज़िक्र।
  • “हिंदू कभी आतंकवादी नहीं हो सकता”, अमित शाह का सीधा बयान।
  • “अगर नेहरू ने युद्धविराम नहीं किया होता तो PoK भारत का होता।”
  • ऑपरेशन महादेव पर कांग्रेस की आपत्ति पर शाह का पलटवार।

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गुलाम कश्मीर पर अमित शाह का दो टूक जवाब

राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने बार-बार पूछा, “गुलाम कश्मीर कब वापस लाओगे?” इस पर अमित शाह ने दृढ़ता से जवाब दिया,

“गुलाम जम्मू-कश्मीर(POK) को वापस लाने का काम भाजपा सरकार ही करेगी और अगले 30 वर्षों तक भाजपा की ही सरकार रहेगी।”

उन्होंने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यदि उन्होंने युद्धविराम की जल्दबाजी न की होती और सेना को खुली छूट दी होती, तो आज गुलाम कश्मीर भी भारत का हिस्सा होता।

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ऑपरेशन सिंदूर: आत्मरक्षा का अधिकार और वैश्विक समर्थन

शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के उद्देश्य और सफलता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुसार भारत के आत्मरक्षा के अधिकार के तहत शुरू किया गया, और 193 सदस्य देशों ने इसका समर्थन किया।

“ऑपरेशन अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल रहा। यह भारत की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम था।”

ऑपरेशन महादेव पर विवाद और अमित शाह का पलटवार

महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता पृथ्वीराज चह्वाण ने ‘ऑपरेशन महादेव’ का नामकरण सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की नीयत से किया गया बताकर आपत्ति जताई।

इस पर शाह ने स्पष्ट कहा: हर हर महादेव’ छत्रपति शिवाजी महाराज का युद्धघोष था। यह धार्मिक नहीं, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। सेना के सभी युद्धघोष धार्मिक प्रतीकों से प्रेरित होते हैं, इन्हें भाजपा ने नहीं बनाया।”

हिंदू आतंकवाद का मिथक: कांग्रेस की राजनीति पर हमला

शाह ने विपक्ष विशेषकर कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा:

“कांग्रेस ने सिर्फ वोट बैंक के लिए हिंदुओं को आतंकवादी साबित करने की कोशिश की, फर्जी केस बनाए, लेकिन एक भी केस अदालत में साबित नहीं हो सका। हिंदू कभी आतंकवादी नहीं हो सकता।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की इसी मानसिकता के चलते पोटा (POTA) को भी हटाया गया, ताकि आतंकियों को राजनीतिक संरक्षण मिल सके।

कश्मीर में आतंकवाद पर लगाम: आंकड़ों से दिया जवाब

जब विपक्ष ने सवाल उठाया कि अनुच्छेद 370 हटाने के बावजूद आतंकवाद क्यों नहीं रुका, तो शाह ने कहा:

“कांग्रेस ने आतंकवाद की जो गहरी जड़ें डालीं, उसे खत्म करने में समय लगेगा। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। कश्मीर का आतंकवादी इकोसिस्टम पूरी तरह नष्ट हो गया है।”

शाह के अनुसार:

  • पिछले 6 महीनों में कोई भी कश्मीरी युवक आतंकवादी संगठनों में शामिल नहीं हुआ।
  • आतंकी घटनाओं की संख्या में 60% की गिरावट आई है।
  • सीमा पार से होने वाली घुसपैठ लगभग शून्य हो गई है।

राजनीति बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा: शाह का बड़ा सवाल

शाह ने कांग्रेस पर सीधा आरोप लगाया कि उनकी प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं, बल्कि वोट बैंक की राजनीति है। उन्होंने कहा:

“हर मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम चश्मे से देखना कांग्रेस की आदत बन गई है। भाजपा की प्राथमिकता राष्ट्रहित और सुरक्षा है।”

आत्मविश्वास से भरे अमित शाह का भारत के भविष्य पर भरोसा

अमित शाह के पूरे भाषण में एक बात बार-बार दोहराई गई —
भाजपा सरकार अगले 30 वर्षों तक देश की बागडोर संभालेगी और PoK को भारत का हिस्सा बनाकर रहेगी।

यह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से भी स्पष्ट संकेत था कि भारत अब रक्षात्मक नहीं, आक्रामक रणनीति अपना रहा है।

विश्लेषण: क्या PoK वापसी वास्तव में संभव है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान सिर्फ संसद में विपक्ष को जवाब देने भर का नहीं है, बल्कि इससे भारतीय विदेश नीति और रक्षा नीति की दिशा स्पष्ट होती है।

  • भारत का कूटनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
  • वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की स्थिति कमजोर हो रही है।
  • कश्मीर में स्थिरता लाकर भारत अब PoK के मसले को वैश्विक समर्थन के साथ आगे बढ़ा सकता है।

निष्कर्ष: संसद से निकला राष्ट्रवाद का स्वर

राज्यसभा की यह चर्चा भारतीय राजनीति में एक नई निर्णायकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। अमित शाह के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि भाजपा सरकार केवल सीमाओं की रक्षा नहीं करेगी, बल्कि ऐतिहासिक भूलों को भी सुधारेगी।

“गुलाम कश्मीर भारत का था, है और रहेगा” – यह भावना अब केवल नारा नहीं, बल्कि सरकारी नीति का हिस्सा बनती दिख रही है।

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