
Sushila Karki Net Worth लगभग 50–100 मिलियन नेपाली रुपये (₹3–6 करोड़) है। 12 सितंबर 2025 को वह नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बनी हैं। जानें उनकी संपत्ति, करियर, शिक्षा और विवाद।
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कौन हैं सुशीला कार्की?
सुशीला कार्की नेपाल की राजनीति और न्यायपालिका, दोनों में ही ऐतिहासिक महत्व रखती हैं। वह नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) रही हैं और अब (12 सितंबर 2025 से) नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री (Interim PM) भी बन चुकी हैं। उनका जीवन एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से शुरू होकर न्यायपालिका और राजनीति की उच्चतम कुर्सी तक पहुँचा है।
प्रारंभिक जीवन और परिवार
- सुशीला कार्की का जन्म नेपाल के पूर्वी क्षेत्र (बिराटनगर, मोरंग ज़िला) में हुआ।
- उनका परिवार किसान परिवार था। पिता खेती करते थे, जिससे बचपन में उन्होंने ग्रामीण जीवन और कठिनाइयों को करीब से देखा।
- बचपन से ही उन्हें पढ़ाई में रुचि थी और यही रुचि आगे चलकर उन्हें ऊँचाइयों तक ले गई।
शिक्षा
- प्रारंभिक शिक्षा नेपाल में हुई।
- स्नातक (B.A.) की पढ़ाई उन्होंने महेंद्र मोरंग कैंपस, बिराटनगर से पूरी की।
- इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए भारत आईं और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी में दाखिला लिया।
- यहाँ से उन्होंने राजनीति शास्त्र (Political Science) में एम.ए. किया।
- शिक्षा के दौरान ही उनका झुकाव सामाजिक न्याय और कानून की ओर बढ़ा, जिसकी वजह से उन्होंने आगे चलकर 1980 के दशक में कानून (Law) की पढ़ाई शुरू की।

कैरियर की शुरुआत
- पढ़ाई पूरी करने के बाद सुशीला कार्की ने कुछ समय तक अध्यापन (Teaching) किया।
- लेकिन जल्द ही उन्हें महसूस हुआ कि कानून और न्यायपालिका ही वह क्षेत्र है जहाँ से वे समाज में बदलाव ला सकती हैं।
- उन्होंने मानवाधिकार से जुड़े मामलों पर काम शुरू किया और धीरे-धीरे नेपाल की कानूनी दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
न्यायपालिका में सफर
- 2009: नेपाल सुप्रीम कोर्ट में उन्हें एड-हॉक जज नियुक्त किया गया।
- 2010: उन्हें सुप्रीम कोर्ट की स्थायी जज बनाया गया।
- 2016: वे नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) बनीं। यह उपलब्धि नेपाल के इतिहास में मील का पत्थर है।
- 2017: उन पर महाभियोग (Impeachment Motion) लाया गया, जिसके चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा। यह कदम बेहद विवादास्पद रहा।
- आलोचकों का कहना था कि वे राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप करती थीं।
- जबकि समर्थकों का मानना था कि उन्हें भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाव के खिलाफ आवाज उठाने की सज़ा दी गई।

राजनीतिक भूमिका और प्रधानमंत्री पद तक का सफर
नेपाल में संकट की पृष्ठभूमि (2025)
- 2025 में नेपाल की राजनीति एक गहरे संकट से गुज़री।
- सरकार ने अचानक 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (Facebook, Instagram, X, YouTube आदि) पर प्रतिबंध लगा दिया।
- इस प्रतिबंध ने खासकर Gen Z युवाओं को नाराज़ कर दिया, क्योंकि उनकी ज़िंदगी, काम और राजनीति का बड़ा हिस्सा डिजिटल दुनिया पर निर्भर है।
- इसके खिलाफ देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
- विरोध इतना उग्र हुआ कि सड़कों से लेकर संसद तक जनसैलाब उमड़ पड़ा।
- इस दौरान झड़पों में दर्जनों लोगों की मौत और सैकड़ों घायल होने की खबरें आईं।
केपी शर्मा ओली का इस्तीफा
- तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर आरोप लगा कि उन्होंने जनभावनाओं की अनदेखी की और जनता की आवाज़ दबाने की कोशिश की।
- भारी जनदबाव, विपक्षी दलों के विरोध और देश में बिगड़ते हालात को देखते हुए ओली ने इस्तीफा दे दिया।
- इस्तीफे के बाद नेपाल राजनीतिक अस्थिरता की ओर बढ़ गया, क्योंकि संसद बिखर चुकी थी और जनता का भरोसा नेताओं पर लगभग खत्म हो गया था।
नए नेतृत्व की तलाश
- इस अस्थिरता में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने सेना प्रमुख, राजनीतिक दलों और नागरिक समाज से बातचीत शुरू की।
- उद्देश्य था – ऐसा व्यक्ति चुनना जो ईमानदार छवि, निष्पक्षता और जनता का भरोसा हासिल कर सके।
- राजनीतिक दलों में किसी एक पर सहमति नहीं बन पा रही थी, ऐसे में विकल्प सामने आया — पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की।

क्यों चुनी गईं सुशीला कार्की?
- वह राजनीतिक दलों से सीधी तौर पर जुड़ी नहीं थीं।
- उनकी छवि एक सख्त, ईमानदार और निष्पक्ष न्यायाधीश की रही है।
- वे पहले भी मानवाधिकार, न्याय और भ्रष्टाचार विरोधी रुख के लिए पहचानी जाती थीं।
- खासकर Gen Z आंदोलनकारी युवाओं ने भी उनके नाम का समर्थन किया, क्योंकि वे उन्हें एक “क्लीन और ट्रस्टेड” विकल्प मानते थे।

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प्रधानमंत्री पद की शपथ
- 12 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में सुशीला कार्की ने नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
- इस शपथ के साथ ही वे नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बन गईं।
- उनके सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी:
- देश को शांति और स्थिरता की ओर ले जाना।
- विरोध प्रदर्शनों में मारे गए नागरिकों के परिवारों को न्याय दिलाना।
- अगले आम चुनावों की तैयारी करवाना।
- सोशल मीडिया और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर विश्वास बहाल करना।
उनकी भूमिका का महत्व
- सुशीला कार्की का प्रधानमंत्री बनना केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव था।
- यह पहली बार था जब न्यायपालिका से आई एक महिला इतनी ऊँची राजनीतिक कुर्सी तक पहुँची।
- उनके नेतृत्व को नेपाल की युवा पीढ़ी की जीत भी माना गया, जिसने सड़कों पर संघर्ष कर बदलाव की राह बनाई।
Sushila Karki Net Worth (संपत्ति)
- न्यायपालिका में उनकी मासिक सैलरी लगभग 1 लाख नेपाली रुपये (₹62,000) थी।
- रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 50–100 मिलियन नेपाली रुपये यानी लगभग ₹3–6 करोड़ भारतीय रुपये है।
- जीवनशैली सादा रही है और उन्होंने हमेशा ईमानदारी की छवि बनाए रखी।
source : Google News