Unnao Rape Case: 8 साल का संघर्ष, हाई कोर्ट के फैसले से टूटी सर्वाइवर की हिम्मत

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Unnao Rape Case

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Unnao Rape Case:उन्नाव रेप केस की कहानी, जहां एक सर्वाइवर ने आठ साल में परिवार खोया, मौत से लड़ी जंग और आज भी न्याय की उम्मीद रखी।

Unnao Rape Case: आठ साल का संघर्ष, हाई कोर्ट के फैसले से टूटी सर्वाइवर की हिम्मत

Unnao Rape Case: उन्नाव रेप केस की सर्वाइवर एक बार फिर न्याय व्यवस्था से निराश नजर आ रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया फैसले के बाद उन्होंने कहा है कि अब देश की हर बेटी की हिम्मत टूट चुकी है। उनका कहना है कि अगर रेप होगा तो या तो लड़की को मार दिया जाएगा या फिर आरोपी कुछ साल जेल में रहकर बाहर आ जाएगा।

सर्वाइवर ने सवाल उठाया कि जब अदालत में बहस चल रही थी, उस वक्त सीबीआई क्या कर रही थी। उनके मुताबिक, इस तरह के फैसले पीड़ितों को और कमजोर करते हैं।

Unnao Rape Case,आठ साल में उजड़ा पूरा जीवन

बीते आठ वर्षों में इस रेप सर्वाइवर की जिंदगी लगातार त्रासदियों से भरी रही है। साल 2017 में रेप और गैंगरेप के बाद उनके पिता की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई। इसके बाद एक सड़क हादसे में उनकी चाची, मौसी और वकील की जान चली गई। खुद सर्वाइवर छह महीने तक वेंटिलेटर पर रहीं और जिंदगी और मौत की जंग लड़ी।

इस दौरान मुकदमे चले, आरोपी गिरफ्तार हुए और सज़ाएं भी सुनाई गईं, लेकिन अब दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले से सर्वाइवर की नाराजगी साफ झलक रही है।

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“अगर बहस हिंदी में होती तो मैं खुद केस लड़ लेती”

सर्वाइवर का कहना है कि अदालत में पूरी बहस अंग्रेज़ी में होने के कारण वह हर बात ठीक से समझ नहीं पाईं। उन्होंने कहा कि अगर बहस हिंदी में होती तो वह खुद अपना केस मजबूती से रख पातीं।

उनके मुताबिक, जब अदालत ने आरोपी को कुछ शर्तों के साथ राहत दी, तब उन्हें केवल “अलाउ” शब्द सुनकर ही अंदाजा हो गया था कि फैसला उनके खिलाफ जा रहा है। उन्होंने कहा कि पांच किलोमीटर की दूरी आरोपी के लिए कोई मायने नहीं रखती, वह अपने लोगों से कुछ भी करवा सकता है।

Unnao Rape Case,नाबालिग थीं पीड़िता, उम्रकैद की सजा हुई थी

जब साल 2017 में पीड़िता ने तत्कालीन बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर रेप का आरोप लगाया, तब उनकी उम्र केवल 17 साल थी। साल 2019 में दिल्ली की निचली अदालत ने पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर यौन हिंसा का दोषी मानते हुए सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

यह सजा आईपीसी की धारा 376(2)(बी) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5(सी) के तहत दी गई थी, क्योंकि आरोपी को लोक सेवक माना गया था।

unnao rape case,विधायक लोक सेवक नहीं? हाई कोर्ट की टिप्पणी

सेंगर के वकीलों ने तर्क दिया कि विधायक को आईपीसी के तहत लोक सेवक नहीं माना जा सकता। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस दलील से सहमति जताई और सुप्रीम कोर्ट के 1984 के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि आपराधिक कानून की परिभाषा में लोक सेवक नहीं आते।

इसी आधार पर हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में बदलाव किया, जिससे सर्वाइवर बेहद आहत हैं।

“जब इतना बड़ा मामला है, तो बाकी केस तो कुछ भी नहीं”

सर्वाइवर ने साफ कहा है कि जब इतने गंभीर मामले में आरोपी को राहत मिल सकती है, तो उनके पिता की गैर-इरादतन हत्या जैसे मामलों में आरोपी के लिए जेल से बाहर आना कोई बड़ी बात नहीं है।

हालांकि, इस हत्या के मामले में सेंगर को दस साल की सजा सुनाई गई थी और 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा निलंबन की अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि सर्वाइवर की सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा है।

साजिश केस में आरोपमुक्ति

दिसंबर 2021 में अदालत ने सर्वाइवर, उनके रिश्तेदारों और वकील की हत्या की साजिश के मामले में सेंगर को आरोपमुक्त कर दिया था। अदालत का कहना था कि इस मामले में प्रथम दृष्टया कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया।

यह मामला उस सड़क हादसे से जुड़ा था, जिसमें बिना नंबर प्लेट वाले ट्रक ने सर्वाइवर की कार को टक्कर मारी थी। इस हादसे में उनके दो रिश्तेदारों और वकील की मौत हो गई थी।

Unnao Rape Case,आज भी डर के साए में ज़िंदगी

सर्वाइवर ने बताया कि साल 2017 में ही उन्हें उन्नाव छोड़ना पड़ा था। लगातार धमकियां मिलती रहीं और पूरे परिवार को जान से मारने की साजिशें रची गईं। भारी सुरक्षा के बावजूद आज भी डर बना हुआ है।

उनका कहना है कि आरोपी सामने से हमला न करे, लेकिन अपने सहयोगियों के जरिए कुछ भी करवा सकता है।

दो बच्चों की मां, लेकिन संघर्ष जारी

आज सर्वाइवर दो बच्चों की मां हैं। उनके पति की नौकरी छूट चुकी है और वह घर पर बच्चों की देखभाल कर रहे हैं। बातचीत के दौरान भी उन्हें अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता रहती है।

सर्वाइवर का कहना है कि उन्होंने अपना पूरा परिवार खो दिया, लेकिन फिर भी हार नहीं मानेंगी। वह तब तक संघर्ष जारी रखेंगी, जब तक आरोपी की जमानत रद्द नहीं हो जाती।

Source:Google news

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